खान सर के अस्पताल में जांच के दौरान जो दिखा, उसे देखकर अधिकारी भी रह गए चौंक
हाइलाइट्स
फायर सेफ्टी जांच में खान हेल्थ केयर अस्पताल में कई गंभीर कमियां सामने आईं।
अस्पताल की G+5 इमारत में नियमों के अनुरूप दूसरी सीढ़ी नहीं मिली।
फायर फ्लोर प्लान और पर्याप्त स्प्रिंकलर सिस्टम का अभाव पाया गया।
प्रशासन ने सुरक्षा मानकों को लेकर अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी किया।
15 दिनों के भीतर सभी कमियां दूर करने के निर्देश दिए गए हैं।
खान हेल्थ केयर पर बड़ा सवाल! फायर सेफ्टी जांच में मिलीं गंभीर खामियां, 15 दिन का अल्टीमेटम
फायर सेफ्टी जांच में सामने आईं चौंकाने वाली कमियां
देश के चर्चित शिक्षक और प्रतियोगी परीक्षाओं के छात्रों के बीच लोकप्रिय खान सर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। हाल के दिनों में विभिन्न विवादों और प्रशासनिक जांचों के कारण चर्चा में रहे खान सर के अस्पताल "खान हेल्थ केयर" को लेकर अब एक नया मामला सामने आया है। इस बार चर्चा का केंद्र अस्पताल में हुई फायर सेफ्टी जांच है, जिसमें सुरक्षा मानकों से जुड़ी कई गंभीर खामियां उजागर हुई हैं।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल जैसी संवेदनशील जगहों पर सुरक्षा नियमों की अनदेखी किसी बड़े खतरे को जन्म दे सकती है। इसी कारण फायर सेफ्टी जांच में सामने आई कमियों को गंभीरता से लिया गया है और अस्पताल प्रबंधन को जल्द सुधार के निर्देश दिए गए हैं।
क्यों चर्चा में है फायर सेफ्टी जांच?
अस्पतालों में हर दिन सैकड़ों मरीज, उनके परिजन और स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहते हैं। ऐसे में किसी भी आपात स्थिति, विशेषकर आग लगने जैसी घटना से निपटने के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था होना बेहद आवश्यक माना जाता है।
हाल ही में की गई फायर सेफ्टी जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि अस्पताल भवन में कई ऐसे बुनियादी सुरक्षा प्रबंध नहीं हैं, जो नियमों के अनुसार अनिवार्य माने जाते हैं। यही वजह है कि यह मामला प्रशासन और आम लोगों दोनों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में क्या दावा?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अनुमंडल पदाधिकारी इंद्रजीत कुमार के नेतृत्व में हुई फायर सेफ्टी जांच के दौरान अस्पताल भवन का विस्तृत निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में पाया गया कि अस्पताल की इमारत G+5 श्रेणी की है, लेकिन सुरक्षा मानकों के अनुरूप वहां दो सीढ़ियों की व्यवस्था नहीं है।
केवल एक सीढ़ी मिली
जांच टीम को भवन में केवल एक सीढ़ी दिखाई दी। अधिकारियों का कहना है कि ऊंची इमारतों में लोगों की सुरक्षित निकासी के लिए कम से कम दो सीढ़ियां होना अनिवार्य है।
फायर सेफ्टी जांच के दौरान यह कमी सबसे गंभीर बिंदुओं में से एक मानी गई क्योंकि किसी आपातकालीन स्थिति में एक ही सीढ़ी पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है।
एक सीढ़ी और लिफ्ट क्यों पर्याप्त नहीं?
कई लोगों के मन में सवाल उठ सकता है कि यदि भवन में लिफ्ट मौजूद है तो दूसरी सीढ़ी की आवश्यकता क्यों है। लेकिन फायर सेफ्टी जांच से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि आग लगने की स्थिति में लिफ्ट का उपयोग सुरक्षित नहीं माना जाता।
आग के दौरान लिफ्ट बन सकती है खतरा
जब किसी भवन में आग लगती है तो अत्यधिक तापमान के कारण धातु के हिस्सों में फैलाव हो सकता है। इससे लिफ्ट फंसने या तकनीकी रूप से निष्क्रिय होने का खतरा बढ़ जाता है।
इसी वजह से फायर सेफ्टी जांच के नियमों में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ऊंची इमारतों में लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए अतिरिक्त सीढ़ियां अनिवार्य होनी चाहिए। अस्पतालों में यह आवश्यकता और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि यहां मरीजों को स्ट्रेचर और व्हीलचेयर पर भी बाहर निकालना पड़ सकता है।
फायर फ्लोर प्लान की कमी भी आई सामने
फायर सेफ्टी जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि अस्पताल में फायर फ्लोर प्लान की समुचित व्यवस्था नहीं है। यह एक ऐसा दस्तावेज या नक्शा होता है जो किसी भी व्यक्ति को भवन के भीतर उसकी वर्तमान स्थिति और निकटतम निकास मार्ग की जानकारी देता है।
हर मंजिल पर लगाने का निर्देश
जांच टीम ने अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिया है कि प्रत्येक मंजिल पर फायर फ्लोर प्लान लगाया जाए। फायर सेफ्टी जांच के विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी आपात स्थिति में यह प्लान लोगों को घबराहट से बचाने और सही दिशा में निकलने में मदद करता है।
विशेष रूप से अस्पतालों में जहां मरीजों और उनके परिजनों को भवन की संरचना की जानकारी नहीं होती, वहां यह व्यवस्था बेहद उपयोगी साबित होती है।
स्प्रिंकलर सिस्टम पर भी उठे सवाल
फायर सेफ्टी जांच की रिपोर्ट में एक और महत्वपूर्ण कमी सामने आई। अधिकारियों ने पाया कि अस्पताल में पर्याप्त संख्या में स्प्रिंकलर नहीं लगाए गए हैं।
स्प्रिंकलर सिस्टम आधुनिक अग्नि सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यह आग को शुरुआती चरण में ही नियंत्रित करने में मदद करता है और बड़े हादसे की संभावना को कम करता है।
कैसे काम करता है स्प्रिंकलर सिस्टम?
फायर सेफ्टी जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार प्रत्येक स्प्रिंकलर हेड में एक विशेष कांच की नली लगी होती है, जिसमें ग्लिसरीन आधारित तरल भरा रहता है।
जब आसपास का तापमान निर्धारित सीमा से अधिक बढ़ जाता है तो यह तरल फैलता है और कांच का बल्ब टूट जाता है। इसके बाद स्प्रिंकलर का वाल्व अपने आप खुल जाता है और पानी का छिड़काव शुरू हो जाता है।
यही कारण है कि फायर सेफ्टी जांच में स्प्रिंकलर सिस्टम को सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरणों में शामिल किया जाता है।
अस्पतालों में फायर सेफ्टी क्यों है बेहद जरूरी?
अस्पताल सामान्य व्यावसायिक इमारतों से अलग होते हैं। यहां ऐसे मरीज मौजूद होते हैं जो स्वयं चलने-फिरने में सक्षम नहीं होते। किसी भी आगजनी की घटना में उन्हें सुरक्षित निकालना चुनौतीपूर्ण कार्य होता है।
मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
फायर सेफ्टी जांच का मुख्य उद्देश्य केवल नियमों का पालन सुनिश्चित करना नहीं होता, बल्कि मरीजों, डॉक्टरों और कर्मचारियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना होता है।
देश में अतीत में कई अस्पतालों में आग लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें जान-माल का भारी नुकसान हुआ था। इन घटनाओं के बाद प्रशासन ने अस्पतालों में सुरक्षा मानकों को और सख्त किया है।
15 दिनों का समय, फिर हो सकती है कार्रवाई
फायर सेफ्टी जांच के बाद प्रशासन ने अस्पताल प्रबंधन को सभी कमियां दूर करने के लिए 15 दिनों का समय दिया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित अवधि के भीतर सुधार नहीं किए गए तो नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि अभी तक अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस संबंध में कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन प्रशासन का रुख साफ है कि सुरक्षा मानकों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
क्या होगा अगला कदम?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अस्पताल निर्धारित समय में आवश्यक सुधार कर लेता है तो भविष्य में किसी संभावित जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। वहीं यदि निर्देशों का पालन नहीं हुआ तो प्रशासनिक कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
खान हेल्थ केयर में हुई फायर सेफ्टी जांच ने अस्पताल सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं। दूसरी सीढ़ी की अनुपस्थिति, फायर फ्लोर प्लान का अभाव और अपर्याप्त स्प्रिंकलर सिस्टम जैसी कमियां किसी भी अस्पताल के लिए चिंता का विषय मानी जाती हैं।
फिलहाल प्रशासन ने अस्पताल प्रबंधन को सुधार का अवसर दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि अस्पताल सुरक्षा मानकों को पूरा करने के लिए क्या कदम उठाता है। लेकिन इतना तय है कि फायर सेफ्टी जांच ने एक बार फिर यह याद दिला दिया है कि अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि जीवन रक्षा का महत्वपूर्ण आधार है।

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